तेजस विमान में पहली बार हवा में ईंधन भरने का परीक्षण सफल

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भारतीय वायुसेना ने स्वदेश निर्मित हल्के लड़ाकू विमान ‘तेजस’ में पहली बार सफलतापूर्वक हवा में ही ईंधन भरा। भारतीय वायुसेना वर्तमान में एक प्रारंभिक ऑपरेटिंग क्लीयरेंस मानक में निर्मित नौ तेजस लड़ाकू विमानों का संचालन करती है। इन जेटों को तमिलनाडु के सुलूर वायुसेना स्टेशन पर आधारित नंबर 45 स्क्वाड्रन, फ्लाइंग डैगर्स द्वारा उड़ाया जा रहा है।

रूस निर्मित आईएल-78 एमकेआई टैंकर ने तेजस एमके आई के एक विमान में ईंधन भरा। इस दौरान एक अन्य तेजस विमान इस पूरी प्रक्रिया पर कड़ी नजर रखे हुये था। ये टैंकर आगरा में वायुसेना अड्डे से भेजा गया था, जबकि लड़ाकू विमान ने ग्वालियर से उड़ान भरा था। विशेषरूप से निर्मित तेजस विमान ने टैंकर के साथ ड्राई कॉन्टैक्ट सहित कई परीक्षणों को पूरा किया। परीक्षण उड़ान से पहले सभी तरह के जमीनी परीक्षण भी किये गये थे। इस सफल परीक्षण से स्वदेशी तेजस की ताकत बढी है और यह लंबी अवधि के मिशन को भी बखूबी अंजाम देने में सक्षम बन गया है।

एलसीए तेजस के बारे जानकारी

  • एलसीए तेजस भारत द्वारा विकसित किया जा रहा एक हल्का और कई तरह की भूमिकाओं वाला जेट लड़ाकू विमान है। यह हिन्दुस्तान एरोनाटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा विकसित एक सीट और एक जेट इंजन वाला विमान है। अनेक भूमिकाओं को निभाने में सक्षम एक हल्का युद्धक विमान है।

तेजस की विशेषतायें

  • लड़ाकू विमान तेजस 50 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है।
  • विमान तेजस में हवा से हवा में मार करने वाली डर्बी मिसाइल समाहित की गयी है।
  • तेजस में जमीन पर निशाना लगाने के लिये आधुनिक लेजर गाइडेड बम लगे हुये हैं।
  • ताकत के मामले में यह पुराने मिग-21 से कही अधिक दमदार है और इसकी तुलना मिराज-2000 से की जा सकती है।
  • इसमें सेंसर तरंग रडार लगाया गया है जो दुश्मन के विमान या जमीन से हवा में दागी गयी मिसाइल के तेजस के पास आने की सूचना देता है।

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