विश्व भर में 17 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस मनाया गया

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17 अक्टूबर 2018 को अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस मनाया गया। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य विश्व समुदाय में गरीबी दूर करने के लिए किये जा रहे प्रयासों के संबंध में जागरूकता बढ़ाना है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेर्रेस ने 15 अक्टूबर को आयोजित वर्ष 2018 अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस के अवसर पर वक्तव्य जारी कर सभी को गरीबी उन्मूलन के लिए विज्ञान-प्रौद्योगिकी के विकास को बढ़ाने की अपील की। ताकि वर्ष 2030 तक गरीबी उन्मूलन का लक्ष्य पूरा किया जा सके।

संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य में यह बताया गया है कि किसी एक विशेष कारण के चलते नहीं बल्कि विभिन्न कारणों की वजह से लोगों को गरीबी में जीवन व्यापन करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इसलिए यह आवश्यक है कि केवल आय का स्रोत एवं आमदनी ही गरीबी का कारण नहीं है बल्कि भोजन, घर, भूमि, स्वास्थ्य आदि भी गरीबी के निर्धारण में भूमिका निभाते हैं।

भारत में गरीबी का मुख्य कारण बढ़ती जनसंख्या, कमजोर कृषि, भ्रष्टाचार, रूढ़िवादी सोच, जातिवाद, अमीर गरीब में ऊंच-नीच, नौकरी की कमी, अशिक्षा, बीमारी आदि है।

भारत एक कृषि प्रधान देश है जिसकी एक बड़ी जनसंख्या कृषि पर निर्भर है, आज देश के यही किसान गरीबी की मार झेल रही है। खराब कृषि और बेरोजगारी की वजह से लोगों को भोजन की कमी से जूझना पड़ता है। यही कारण है कि महंगाई ने भी पंख फैला रखे हैं। वहीं भारत में बढ़ती जनसंख्या भी गरीबी का एक प्रमुख कारण है।

भारत में गरीबी-दर

केंद्र सरकार ने वर्ष 2012 में बताया कि भारत में 21.9 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से नीचे रहती है. विश्व बैंक की वर्ष 2011 रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की 23.6 प्रतिशत जनसंख्या (लगभग 276 मिलियन) की प्रतिदिन क्रय शक्ति 1.25 डॉलर प्रतिदिन है। इसके अतिरिक्त 2016 में जारी अंतरराष्ट्रीय भुखमरी सूचकांक में भारत को 97वां स्थान मिला है। इसमें विकासशील देशों के लिए औसत दर 21.3 रखी गयी थी जबकि भारत की यह दर 28.5 प्रतिशत थी।

पृष्ठभूमि

संयुक्त राष्ट्र द्वारा 22 दिसम्बर 1992 को प्रत्येक वर्ष 17 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस मनाये जाने की घोषणा की गयी. इस दिवस पर विभिन्न राष्ट्रों द्वारा गरीबी उन्मूलन के लिए प्रयास, विकास एवं विभिन्न कार्यों व योजनाओं को जारी किया जाता है।

यह दिवस पहली बार वर्ष 1987 में फ्रांस में मनाया गया जिसमें लगभग एक लाख लोगों ने मानव अधिकारों के लिए प्रदर्शन किया था। यह आंदोलन एटीडी फोर्थ वर्ल्ड के संस्थापक जोसफ व्रेंसिकी द्वारा आरंभ किया गया।

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