15 अक्टूबर को मनाया गया अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस

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विश्व भर में 15 अक्टूबर 2018 को अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस मनाया गया. इस वर्ष का विषय था – सस्टेनेबल इन्फ्रास्ट्रक्चर, सर्विसेज एंड सोशल प्रोटेक्शन फॉर जेंडर इक्वलिटी एंड द एम्पावरमेंट ऑफ़ रूरल वीमेन गर्ल्स।

उद्देश्य

इस दिवस का उद्देश्य कृषि विकास, ग्रामीण विकास, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण गरीबी उन्मूलन में ग्रामीण महिलाओं के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करना हैं। विदित हो विकासशील देशों में लगभग 43 प्रतिशत महिलाएँ कृषि श्रमिक के रूप में कार्य करती हैं और खाद्य क्षेत्र से जुड़ी रहती हैं।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, यदि ग्रामीण परिवेश की एक महिला को सशक्त बना दिया जाये तो वह अपने पूरे परिवार को स्वयं सशक्त बना सकती है। साथ ही, सतत विकास लक्ष्य जैसे गरीबी, भुखमरी, खाद्य सुरक्षा तथा महिला अधिकारों को बेहतर रूप से लागू किया जा सकता है। यह दिवस ग्रामीण महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका का स्मरण करते हुए उन्हें सशक्त बनाने हेतु मनाया जाता है।

आर्थिक समृद्धि

ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार पालने के लिए उन्हें पशु भी मुहैया करा रही है।

पृष्ठभूमि

  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 15 अक्टूबर 2008 को पहला अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस मनाकर ग्रामीण महिलाओं की भूमिका को सम्मानित करने का निर्णय लिया था।
  • इसको मनाने की घोषणा संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 18 दिसंबर 2007 में की गई थी।
  • ग्रामीण महिलाएं विकसित और विकासशील देशों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • भारत सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को सशक्त करने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें संचार शक्ति योजना भी शामिल है।
  • इस योजना के द्वारा ग्रामीण महिलाओं को सरकारी योजनाओं के साथ स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी उनके फोन पर उपलब्ध कराई जाती है।
  • साल 2012 में शुरू हुई ‘आनंदधारा’ योजना ग्रामीण गरीबों के लिए एक गरीबी-उन्मूलन कार्यक्रम है जिसे महिला स्वयं सहायता समूहों के जरिए लागू कराया जाता है।
  • ग्रामीण महिलाएँ जो अपने जीवनयापन के लिए कृषि और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर रहती हैं विश्व की एक चौथाई जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करती हैं।

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